पाठ्यक्रम वर्णन

परमहंस योगानंद ने लिखा था कि, ‘ध्यानयोग सबसे उच्चतम रूप का कार्य है जो मनुष्य कर सकता है।” यह सबसे कुदरती और फायदेमंद मानवीय कार्यों में से एक है। यह हमे उच्च चेतना का प्रत्यक्ष अंतर्ज्ञानी अनुभव देता है और यह आध्यात्मिकता की आधारशिला है। यह संतुलन, आराम और बढ़ती हुई आंतरिक शांति भी प्रदान करता है।

यह पाठ्यक्रम उन सभी लोगो को प्रस्तुत किया जा रहा है जो ध्यान करना सीखना चाहतें हैं, चाहे वे किसी भी धर्म को मानते हों या कोई पिछला आध्यात्मिक ज्ञान हो। चाहे आप ध्यानयोग में शुरुआती हों या नहीं, यह पाठ्यक्रम आपको गहरी नियमित साधना स्थापित करने और विकसित करने में मदद करेगा और आंतरिक शांति, आनन्द और दिव्य प्रेम को जागृत करेगा जो आपकी असली प्रकृति का हिस्सा हैं।

यह पाठ्यक्रम क्रिया योग के पथ के चार चरणो में से पहला चरण है।

इसे एक स्वसंपूर्ण ‘ध्यानयोग करना सीखो’ पाठ्यक्रम की तरह भी कर सकतें है।

घर से ही ध्यानयोग करना सीखें

इस पाठ्यक्रम में  7 पाठ शामिल है और इन्हे पूरा करने के लिए आपको  6 हफ्ते दिए जायेंगे।

हर पाठ में एक मिश्रित रूप से पढ़ने की सामग्री, शिक्षाप्रद वीडियो और ध्यान की दिनचर्या होंगे। पूरी पाठ्यक्रम सामग्री जानने के लिए निचे देखें।

यह पाठ्यक्रम बेहद विस्तृत है और आप , “ध्यानयोग के लिए कैसे आरामदायक होकर बैठने” से लेकर “गहराई से शांति और आनन्द भावों का अनुभव करना” सीखेंगे

आप क्या सीखेंगे

* एक सरल लेकिन शक्तिशाली ध्यानयोग की तकनीक जिसे आप तुरंत इस्तेमाल कर सकतें है।
* ध्यानयोग के लिए आरामदायक होकर बैठने हेतु सरल सुझाव ।
* कैसे बेचैन मन को शांत करतें है ।
* कैसे अपने दैनिक जीवन में शांति और आनन्द का अनुभव करें।
* सांस और मन के बंधन की महत्वपूर्णता और केंद्रित मन की शक्ति का अनुभव करें।
* प्राण शक्ति के स्तर को नियंत्रण में लाने और बढ़ाने के लिए एक अनुपम व्यायाम पद्धति को सीखें एवं थकान पर विजय प्राप्त करें।

पाठ्यक्रम का शुल्क 500 रुपए है।

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गृहअध्ययन पाठ्यक्रम की अनुपम विशेषताएं

  • Connector.

    व्यक्तिगत सलाह

    आनंद संघ के प्रतिनिधि:
    • आपको व्यक्तिगत सलाह देने, 
    • आपका मार्गदर्शन करने, 
    • आपको  कोर्स संबंधित  तकनीकी सहायता देने और 
    • आपके प्रश्नों के उत्तर देने के लिए उपलब्ध रहेंगे
     आप पूरे पाठ्यक्रम के दौरान इन प्रतिनिधियों के संपर्क में रहें।

  • Connector.

    प्रश्नोत्तरी

    यह सुनिश्चित करने के लिए कि आपने महत्वपूर्ण विषयो को सीख लिया है, हम यह सुझाव देते हैं कि आप हर पाठ के लिए दी गई प्रश्नोत्तरी को पूरा करें। आपके सलाहकार प्रश्नोत्तरी को अंकित करेंगे और राय देंगे।

  • Connector.

    मोबाइल एप के द्वारा सहयोग

    यह पूरा पाठ्यक्रम आपकी सुविधा के लिए मोबाइल ऐप के द्वारा भी उपलब्ध है जिससे कि आसानी से आप इसका पठन कर पाए।

पाठ्यक्रम विषय सूची

  • पाठ १- आरम्भ करें
  • पाठ २- शिथिल होना सीखना
  • पाठ ३- अंतर्मुखी होना
  • पाठ ४- मन को केंद्रित करना – मानसदर्शन, प्रार्थना अवं भजन
  • पाठ ५- विस्तार
  • पाठ ६- प्राण-शक्ति संचारक व्यायाम
  • पाठ ७- ध्यान को दैनिक गतिविधि में लाना

संक्षिप्त में आपको क्या मिलेगा

  • एक सरल परन्तु शक्तिशाली ध्यान की तकनीक जिसको “हाँग सॉ” कहतें हैं।
  • प्राण-शक्ति संचारक व्यायाम जिससे प्राण-शक्ति के स्तर को नियंत्रण में लाएं, बढ़ाएं, एवं थकन पर विजय प्राप्त करें।
  • 7 पाठ 6 हफ़्तों के दौरान।
  • नियमित ध्यान साधना विकसित करने की सहायता।
  • सलाहकार के जरिये आपके आध्यात्मिक प्रशनो का समाधान।

पाठ्यक्रम का शुल्क 500 रुपए है।

हमारी प्रेरणा

परमहंस योगानंद (1893-1952)

परमहंस योगानंद भारत के पहले योग गुरु थे जिन्होंने एक पश्चिमी देश में स्थायी निवास लिया। योगानंद जी अमेरिका 1920 में पहुँचे, और वे पूरे अमेरिका की यात्रा के लिये प्रस्थान करे, जिसे वे अपने “आध्यात्मिक अभियान” कहते थे।

योगानंद जी का पश्चिमी संस्कृति पर शुरुआती प्रभाव शानदार था। परन्तु उनकी आध्यात्मिक विरासत और भी ज़्यादा महान है। उनकी लिखित “एक योगी की आत्मकथा”, जो 1946 में छपी थी, ने पश्चिमी देशों में आध्यात्मिक क्रान्ति प्रारंभ की। दर्जन से ज़्यादा भाषाओं में अनुवाद की गई, यह एक सबसे ज़्यादा बिकने वाली आध्यात्मिक पुस्तक है। योगानंद जी द्वारा पश्चिम में लाया महत्वपूर्ण योगदान आत्मबोध का आध्यात्मिक पथ है।

आत्मबोध प्राप्त करने के लिए, योगानंद जी ने अपने शिष्यों को क्रिया योग की प्राचीन तकनीक में दीक्षा दी, जिसे उन्होंने “ईश्वर तक पहुँचने का जेट विमान मार्ग” कहा है।

आनन्द संघ क्या है?

स्वामी क्रियानन्द (1926-2013)

आनन्द संघ एक विश्वव्यापी आध्यात्मिक संस्था है, जो परमहंस योगानंद की शिक्षाओं पर आधारित है।

स्वामी क्रियानन्द परमहंस योगानंद के प्रत्यक्ष शिष्य और आनन्द संघ के संस्थापक थे। उनकी “सत्य” के लिए गहरी आध्यात्मिक तलाश ने उन्हें , 1948 में 22 साल की कम उम्र में, परमहंस योगानंद जी की “एक योगी की आत्मकथा” को पढ़ने के लिए प्रेरित किया।

योगानंद जी को अपना गुरु पहचानने पर, क्रियानन्द जी ने निश्चय किया कि वे अपनी ज़िन्दगी अपने गुरु की शिक्षाओं का अभ्यास और उनका प्रसार करने में समर्पित करेंगे। योगानंद जी ने क्रियानन्द जी को अपनी पहली ही मुलाकात पर अपना शिष्य स्वीकार किया।

स्वामी क्रियानन्द ने 1968 में आनन्द संघ को स्थापित किया। उन्होंने लगभग 150 पुस्तकें लिखीं और 400 से अधिक गीतों और भजनो की रचना की।

आज के दिन, आनन्द संघ एक विश्वव्यापी संस्था है, जो कई देशों में शामिल हैं।आनंद संघ अपने ध्यान केंद्रों, संघो और ऑनलाइन पेशकशों के ज़रिये से कई हज़ारों लोगों की सेवा करता है।

आनंद संघ के भारतीय और अमरीकी ब्रह्मचारी एक दूसरे के सहयोग से आपको यह गृह अध्यन पाठ्यक्रम प्रस्तुत करते है।।